खुद से करो दोस्ती
संवाद टूट चुका है!
संबंध छूट चुका है!
यही हकीकत जिंदगी,
भांडा फूट चुका है!!1
अनेक समस्या ऐसी!
कही नहीं जायें कैसी!
भीतर ही घूमती रहती हैं,
बड़ी हिमालय जैसी!!2
मतलब नहीं कहने का!
मजबूरी में सहने का!
जिंदगी नरक भी स्वर्ग भी,
ढंग सीख लो सहने का!!3
बैठकर एक कोने में!
फायदा बहुत रोने में!
कहोगे तो उपहास करेंगे,
सीख लो इसी तरह होने में!!4
आंसू बहुत कुछ कहते!
दुख में अविरल बहते!
इनकी पीड़ा न कोई समझे,
किस दुख-सागर में रहते!!5
खुद का खुद से नाता!
न कोई किसी को भाता!
करो सर्वप्रथम खुद से दोस्ती,
मुसीबत में न ब्याहा-ब्याहता!!6
आचार्य शीलक राम
वैदिक योगशाला
कुरुक्षेत्र
आर्यावर्त चिंतन भारतीय दर्शन, सांस्कृतिक विमर्श और राष्ट्रचेतना पर केंद्रित एक वैचारिक एवं शोधपरक डिजिटल मंच है। यह मंच आचार्य शीलक राम जी के वैदिक-दार्शनिक चिंतन, सांस्कृतिक विश्लेषण और समकालीन सामाजिक-राजनीतिक प्रश्नों पर आधारित दृष्टिकोण को सुव्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करता है। यहाँ प्रस्तुत सामग्री में — * भारतीय दार्शनिक परंपराओं का विश्लेषणात्मक अध्ययन * आधुनिक शिक्षा और नैतिक विमर्श का आलोचनात्मक परीक्षण * राष्ट्र और समाज से संबंधित जटिल प्रश्नों का तर्कसंगत विवेचन * परंपरा और आधुनिकता
Thursday, September 19, 2024
खुद से करो दोस्ती (make friends with yourself)
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बढ़िया
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