Monday, July 6, 2026

चंदे की लूटपाट

 चंदे की लूटपाट 
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चंदे  की  लूट है 
राम की आड़ में।
अय्याशी चलेगी 
दुनिया भाड़  में।।

राम का नाम बस 
 मस्त चंदाचोर हैं।
असली राम भक्त
बना दिये ढोर हैं।।

धर्महीन लूटेरे जो 
नहीं कोई मर्यादा।
घर निज भर रहे 
ज्यादा से ज्यादा।।

दूध की रखवाली 
करवा रहे बिल्ली।
छोटे लूटेरे बर्बाद 
बड़े लूटेरे दिल्ली।।

धर्मगुरु राजनीति 
नेता धर्मगुरु बने।
असली रामभक्त 
बजा रहे झुनझुने।।

पावन बस वेश है 
बैठा शैतान भीतर।
नीतिविहीन बने हैं 
गौमांसभक्षी चरित्र।।

हो रहे सभी प्रयास 
सनातन बदनामी के।
पदासीन सरंक्षक नहीं 
बिना लूट कहानी के।।

गजनी पछता रहा 
सिर गौरी पीट रहा।
 इतना लूट न पाये
लूट का परमिट रहा।।

चंगेज आश्चर्य भरा
नादिर रुदन करता।
आज का धर्मगुरु ही
लूटपाट में विचरता।।

असली जो धर्माचार्य 
बैठा दिये हैं कोने में।
नकली धर्माचार्य बन 
पापबीज को बोने में।।

रामनाम की लूट नहीं 
धन-दौलत की लूट है।
छल,कपट, धोखाधड़ी 
भक्ति इनकी अटूट है।।

राम धन या धन राम 
भक्त कौन किसका है।
सत्व-प्रधान भयभीत 
आसुरी लूट चस्का है।।

तुम बस दान करो
हम बस लूट करेंगे।
मूल्य वही सनातनी 
जो हमको सूट करेंगे।।

न्यायालय  हमारा है 
पुलिस भी हमारे संग।
 एजेंसी जी-हुजूरी करें 
सिस्टम पूरा बना अपंग।।

सरेआम लूटेरे हम 
देख लो तुम रोककर।
जिसको चाहे लूटेंगे 
कहते सीना ठोककर।।

न भारत से मतलब 
न सनातन फिक्र है।
अब्राहम मानसपुत्र 
जीवन-शैली जिक्र है।।

राम हों चाहे कृष्ण 
चाहे मनु भगवान् हों।
सांगा,प्रताप,शिवाजी 
लूट सभी घमसान हों।।

कुछ अंधभक्त पहले से 
कुछ को बना रखा है।
अरबों- खरबों लूट का 
इसी से ही स्वाद चखा है।।

हमारी लूट राष्ट्रभक्ति 
सेवा उनकी राष्ट्रद्रोह।
राष्ट्रसेवक जो मानते 
वो प्रचंड मूर्ख ओह।।

लूट हमारा दर्शन है
लूट है हमारी नीति।
धन,जोबन छोड़कर 
न धर्म,राष्ट्र से प्रीति।।

बाकी सब लूट लिया 
मंदिरों की अब पारी।
चंदा हो या चढावा हो
लूट नीति सब पर भारी।।

कैसा भी लूटेरा हो
कोई बड़ा बदमाश।
बस हमारी शरण हो
करे सुखद अहसास।।

चोर,उचक्के,डाकू 
छटे हुये  अपराधी।
बलात्कारी कैसा भी
भोगासक्ति  समाधि।।

सोना,चांदी लूट है 
हजारों महंगी ईंट।
धर्म विकृत कर रहे 
भ्रष्टाचरण अमिट।।

पाचन मजबूत है 
सब कुछ पचता।
सत्य साधु ,सिद्ध 
भाग रहा बचता।।

भवन  आलीशान 
महलनुमा निवास हैं।
इंद्र भी शर्मा जाये
अट्टालिकाएं खाश हैं।।

विद्यालय जर्जर हुये
टपकते बरसात में।
कंकालनुमा छात्र हैं 
 बैठे जैसे हवालात में।।

शिक्षा बर्बाद होई 
शोध-कार्य बंद है।
करता जो लूटपाट 
वही अक्लमंद है।।

भगवान् मंदिर चाहे
मंदिर चाहे शिक्षा का।
पेपर  लीक  हो रहे
भट्ठागोल परीक्षा का।।

लोकतंत्र बना लूटतंत्र 
हितचिंतक यहां कौन।
जनमानस भयभीत सा 
न्यायालय भी बैठा मौन।।
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डॉ. शीलक राम आचार्य 
वैदिक योगशाला

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