मैनीफैस्टेशन करने और करवाने वालों की सोशल मीडिया पर भीड़ लगी हुई है। इसके माध्यम से जीवन और जगत् में कुछ भी भौतिक, मानसिक और आध्यात्मिक मिलने के लिये प्रलोभन दिये जा रहे हैं। मैनीफैस्टेशन किया और चमत्कार हो गया - ऐसी तसल्ली दी जा रही है। हालांकि यदि यह बात पूरी तरह से सच होती तो सर्वप्रथम मैनीफैस्टेशन करवाने वाले अपने आपको ही करोड़पति/अरबपति बना लेते।जिस तरह से मैनीफैस्टेशन के संबंध में प्रचार किया जा रहा है,अब तक उसका अभ्यास करके ये खुद ही विधायक, सांसद, कुलपति, एसपी, आईएएस बन जाते। इसके अभ्यास द्वारा ये खुद ही दयानंद, विवेकानंद,ओशो, कृष्णमूर्ति,प्रभुपाद, श्रीराम शर्मा आचार्य, जग्गी वासुदेव, रामदेव आदि बन जाते। दूसरे टाटा, बिड़ला,अडानी, अंबानी, गोदरेज,जिंदल आदि को पैदा करके सिद्ध करो। गांधी, नेहरू, सुभाष,पटेल, इंदिरा आदि को बनाकर दिखलाओ। मैनीफैस्टेशन के माध्यम से नये- नये आविष्कार करने का दावा करने वाले पाश्चात्य जगत् ने अनेक दूसरे मैस्मर, निकोला टेस्ला, मर्फी एटकिंसन ,गोडार्ड, हिल, वाटेल्स, हार्नेल, बर्न, हिक्स, डिस्पेंजा,वेन,प्राक्टर,डायर आदि पैदा क्यों नहीं कर लिये? मैनीफैस्टेशन के द्वारा दूसरे डार्विन,आइंस्टीन, मैक्स प्लांक, न्यूटन, क्यूरी, पाश्चर आदि पैदा करके दिखलाओ।जिस प्रकार से मैनीफैस्टेशन को प्रचारित किया जा रहा है,वह धंधा अधिक और सृजन कम है। यदि यह सब करना संभव नहीं है तो मैनीफैस्टेशन से चमत्कार संभव करने वालो को पकड़ो और उन पर कार्रवाई करवाओ। एकाग्रता से हिप्नोसिस या निर्विचारता आदि पैदा करके मैनीफैस्टेशन से अस्तित्व को पुकार लगाकर चमत्कार करके दिखलाओ। यदि अपने आपको तार्किक चिंतन, तार्किक बुद्धि, वैज्ञानिक बुद्धि और तार्किक सोच का समर्थक और प्रचारक कहते हो,तो मैनीफैस्टेशन के द्वारा यह सब सिद्ध करके दिखलाओ। आज तक जो बड़े-बड़े दार्शनिक, विचारक, वैज्ञानिक, काउंसलर , मनोवैज्ञानिक, साहित्यकार, आविष्कारक, अन्वेषक, नेता, सुधारक, धर्माचार्य,संत, मुनि , योगी आदि हुये हैं; वो हो सकता है कि किन्हीं अन्य कारणों से प्रसिद्धि को प्राप्त हुये हों।हो सकता है कि उन्होंने मैनीफैस्टेशन की बजाय अपने जीवन में प्रसिद्धि की ऊंचाई को किन्हीं अन्य योग्यताओं, संभावनाओं और विशेषताओं से अर्जित किया हो।

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